Fishing became more important than children’s life

Fishing becomes more important than children’s life

तपती हुई गर्मी से बेहाल लोगों के लिए अक्सर बरसात का मौसम एक खुशनुमा एहसास लेकर सामने आता है । अभी सावन का महीना शुरु हुए चंद ही दिन हुए हैं वर्षा के मनमोहक दृश्य सभी को लुभाने लगे हैं, नदियों में पानी बहने लगा है, पेड़ पौधे हरे भरे हो गए हैं, पशु पक्षियों में भी आनंद का ही माहौल है । जैसे जैसे बारिश होती रहती है वैसे वैसे ही मौसम में नमी भी बढ़ जाती है और नदियों में तेज बहाव शुरू हो जाता है, इसी तेज बहाव की वजह से मछलियां तथा अन्य जीव-जंतु भी नदियों में आ जाते हैं ।

ऐसा ही अद्भुत दृश्य हमें देखने को मिलता है पंचकूला में स्थित मनसा देवी मंदिर के तीन किलोमीटर दूर स्थित गांव सकेतड़ी में, जहां सुखना नदी बहने लगती है। लेकिन इन सुंदर वातावरण में लोगों की मछली पकड़ने की इच्छाएं भी बढ़ने लगती है।

बता दें कि हर वर्ष सावन के महीने में जब वर्ष की सबसे अधिक वर्षा का मौसम होता है, तो सकेतड़ी में रहने वाले लोगों की मछली पकड़ने की रूचि का भी प्रारंभ हो जाता है। हर वर्ष यहां बहने वाली सुखना नदी से हजारों मछलियां पकड़ी व बेची जाती हैं, मछली पकड़ने की होड़ के बीच लोगों को अपने बच्चों को अपनी जान की कीमत का भी बिल्कुल डर दिखाई नहीं देता, बहती नदी में ही लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को मछली पकड़ने के लिए सुखना नदी में भेज देते हैं, वह बच्चे कई बार इतने छोटे भी होते हैं कि उन्हें ठीक से भागना भी नहीं आता।

ऐसा ही एक मामला कुछ साल पहले भी सामने आया था जब एक बिहार का निवासी जो कि गांव सकेतड़ी में रहता था जिसका नाम राजू था वह अपने छोटे भाई रंजीत के साथ मछली पकड़ने के लिए आया था, और अचानक नदी में आए तेज बहाव के कारण वह बच्चा डूब गया था। प्रशासन की कड़ी मशक्कत के बाद भी उसे नहीं बचा पाए और तीन दिन के बाद उस बच्चे का शव सुखना नदी में कहीं दूर किनारे पर पाया गया था, लेकिन अब उस मृत्यु का भी किसी पर कोई प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा, शायद इन लोगों के लिए इंसान की जिंदगी के आगे मछलियों को पकड़ना ज्यादा जरूरी लग रहा है।

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